(हिंदी) कोचिंग सत्र का अनुभव

माई नवरोज कौर, पंजाब, लाइफ कोच के सेकेंड क्लास में सब का वन ऑन वन कोचिंग होना था, तो मैंने भी बिना त्यागी की रितु ओम मैम के जवाब का जवाब देना स्टार्ट कर दिया, लेकिन जो रिजल्ट निकला के आया वो अमेजिंग था...

माई फ्रीडम चहती थी, एक्सप्लोर करना है लेकिन सब कर रही थी के वो मज़ा नहीं अरहा, कुश मिसिंग है, टीएफ जर्नी का नेक्स्ट स्टेप लेने का टर्न था असल में, उसी के बारे में अंजाने में बात कर बेथी और मेने 2एनडी कॉल्स के उसी दिन मुझे क्लैरिटी हुई के करना क्या है और मैं एक्शन ले पाई... .

आंतरिक कार्य कर के इतनी शांति अगई थी अंदर के कुश फ़र्क नहीं हिस्सा के कहूँ किस स्थिति में हूं, लेकिन अगला कदम लेना तब भी ज़ोरोरी है जब लालसा ना हो, निराशा ना हो, दुनियावी वजह ना हो तब भी आपको अपनी कहानी को पूरा करने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए और न्यूट्रल हो के नेक्स्ट स्टेप लेना चाहिए फॉर द हाईएस्ट गुड ऑफ ऑल...

इसलिए दोनों शिक्षकों को धन्यवाद के माई अधे रास्ते में बेथ के आराम करने की फिराक में थी, अब मैंने फिर कमर कस ली के पूरा करना है अपनी कहानी को।

Navrose kaur
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