मेरे लिए यह कार्यक्रम परमात्मा की तरफ से एक उपहार है।
मेरे पति की कोरोना से मौत के बाद बिल्कुल अन्धकार में थी कुछ समझ नहीं आ रहा था क्या किया जाए कैसे सब संभालू बेटे को देखना है नौकरी देखना है अपने परिवार को भी।
लेकिन खुद ही अटक गई थी। क्या कार्यक्रम को बनाने के लिए खुद पर विश्वास होना चाहिए या फिर सबसे ज्यादा अपने लक्ष्य को तय करना चाहिए?
जिंदगी दूसरो के लिए हम तब ही जी पायेंगे जब हम खुद के लिए कुछ कर पाये।
धन्यवाद मैम धन्यवाद सर 🙏
सरिता गुजारे